आज कल खुशी का हर अहसास मेरे साथ है उड़ना चाहने से पहले ही पंख मुझे मिल गए हैं
मेरी हर उड़ान आजकल अपनी मंजिल नही धुन्धती । रस्तों की तलाश अब ऐसा लगता है थम गई।आजकल खुशबू की हर उड़ान मेरे से अपना घर का पता नही पूछती ,कुछ नया अहसास है मेरे साथ
मुझे कुछ किसी से नही कहना
मे अपने आप ही बहुत खुश हु आजकल
हर पल धन्यवाद कहना चाहती हु उस अलोकिक शक्ति को जो मेरा साथ है
पुस्तक चर्चाः डोढ़ाय चरित मानस आम आदमी का महाकाव्य और भारतीय लोकतंत्र का
कच्चा चिट्ठा
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मैं लंबे समय से कथा और कथेतर पढ़ता आ रहा हूं. माटी की अद्बुत गंध की वजह से
रेणु जी का लेखन बहुत पसंद रहा है और रेणुजी के बारे में भाई गिरीन्द्रनाथ झा
से सु...
5 days ago

# मेरे आज कल के दिन
ReplyDelete# आज पता नही मन क्यों बाहरी हो रहा है ऐसा लग रहा है ...
# पहला ब्लॉग लिख रही हु गलतियां
करते तो हैं सभी गलतियां
ढूंढते बस मेरी गलतियां
श्याम सखा ‘श्याम’
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सस्नेह
श्यामसखा‘श्याम’
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श्याम