आज कल खुशी का हर अहसास मेरे साथ है उड़ना चाहने से पहले ही पंख मुझे मिल गए हैं
मेरी हर उड़ान आजकल अपनी मंजिल नही धुन्धती । रस्तों की तलाश अब ऐसा लगता है थम गई।आजकल खुशबू की हर उड़ान मेरे से अपना घर का पता नही पूछती ,कुछ नया अहसास है मेरे साथ
मुझे कुछ किसी से नही कहना
मे अपने आप ही बहुत खुश हु आजकल
हर पल धन्यवाद कहना चाहती हु उस अलोकिक शक्ति को जो मेरा साथ है
कतरनी चावल चूड़ा और देवघर का पेड़ा
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कुछ खुशबुएँ ऐसी होती हैं जो समय की धूल में भी धुंधली नहीं पड़तीं. वे हमारी
इंद्रियों के किसी गुप्त झरोखे में दुबक कर बैठ जाती हैं और एक मामूली से
स्पर्श मात...
4 weeks ago

# मेरे आज कल के दिन
ReplyDelete# आज पता नही मन क्यों बाहरी हो रहा है ऐसा लग रहा है ...
# पहला ब्लॉग लिख रही हु गलतियां
करते तो हैं सभी गलतियां
ढूंढते बस मेरी गलतियां
श्याम सखा ‘श्याम’
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सस्नेह
श्यामसखा‘श्याम’
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श्याम